Say No to Crackers Speech in Hindi

Say No to Crackers Speech in Hindi

Say No to Crackers Speech in Hindi:- दिवाली में पटाखों का उपयोग क्यों ना करें?

पटाखों के उपयोग से हम अपने पर्यावरण को कैसे प्रदूषित कर रहें?
क्या आतिशबाजी से हमारे पर्यावरण को खतरा है?

दिवाली का महोत्सव हर किसी व्यक्ति के लिए बहुत की ख़ुशी का त्यौहार होता है। पर में आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि दिवाली के त्यौहार के लिए हम एक महीने पूर्व से ही तैयारी करते हैं घर और मोहल्ले की सफाई करते हैं क्या सिर्फ इसलिए ताकि दीपावली के दिन हमें उसी गली-मोहल्ले को प्रदूषित कर सकें?

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दिवाली पर पटाखे जरा संभलकर फोड़ें। जरा सी असावधानी भारी पड़ सकती है और आप अस्पताल पहुंच सकते हैं। हर साल दिवाली पर बड़ी संख्या में बर्न के मामले सामने आते हैं। रंग- बिरंगी रोशनी वाला पटाखा अनार देखने में भले ही अच्छा लगता हो, लेकिन दिवाली पर सबसे ज्यादा जख्म यही देता है। डॉक्टरों के मुताबिक हर साल दिवाली में आने वाले बर्न के मामले में नब्बे फीसदी लोग अनार से ही जले होते हैं।

दमा के मरीज घर से बाहर न निकलें। पटाखों से निकलने वाला धुआं इनके लिए घातक हो सकता है। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश का कहना है कि अनार को लोग हल्के में लेते हैं लेकिन पटाखों में यह सबसे अधिक खतरनाक है। अनार को जलने में 15 से 30 सेकेंड का समय लगता है, और यही इसे खतरनाक भी बनाता है।

लोग उसे बुझा हुआ समझकर उसे फिर से जलाने के लिए नीचे की ओर झुकते हैं। अधिकांश मामलों में यह अचानक जल उठता है, जिससे सामने वाले का चेहरा जल जाता है। अकसर लोग अनार को हाथ में लेकर जलाते हैं कई बार इसका पीछे का पार्ट जल जाता है, जिससे हाथ में बर्न हो जाता है।

क्या नुकसान करते हैं पटाखे??

धुएं और प्रदूषण से अस्थमा की संभावना बढ़ जाती है। फेफड़े में दिक्कत हो सकती है।
पटाखों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ जाता है, जिससे लोगों के सुनने की शक्ति पर असर होता है।
आंखों में जलन, त्वचा में संक्रमण, चिंगारी छिटकने से आंख की कॉर्निया पर बुरा असर।

ये बरतें सावधानियां
जहां तक मुमकिन हो पटाखे जलाने से बचें।
पटाखे जलाते वक्त बच्चों के साथ ही रहें।
दुर्घटना से बचने के लिए साथ में पानी की बाल्टी रखें।
टिन या कांच की बोतल में रखकर पटाखा न जलाएं।
ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए कान में रूई डाल लें।

जलने पर क्या करें
स्किन के जले हुए हिस्से पर बरनॉल नीली स्याही या फिर दवा न लगाएं।
झुलसे हिस्से को बहते पानी में तब तक रखें जब तक जलन खत्म न हो जाए
आंखों में जलन होने पर ठंडे पानी के छींटे मारें और जल्दी डॉक्टर को दिखाएं।

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दिवाली में पटाखों का उपयोग क्यों ना करें? 

पटाखों के उपयोग से हम अपने पर्यावरण को कैसे प्रदूषित कर रहें?
क्या आतिशबाजी से हमारे पर्यावरण को खतरा है?

दिवाली का महोत्सव हर किसी व्यक्ति के लिए बहुत की ख़ुशी का त्यौहार होता है। पर में आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि दिवाली के त्यौहार के लिए हम एक महीने पूर्व से ही तैयारी करते हैं घर और मोहल्ले की सफाई करते हैं क्या सिर्फ इसलिए ताकि दीपावली के दिन हमें उसी गली-मोहल्ले को प्रदूषित कर सकें?

जी हाँ दोस्तों यह सोचने की बात है। ज्यादातर लोग वही कर रहे हैं दिवाली का त्यौहार हमारे जीवन में हम खुशियाँ और समृद्धि लाने के लिए मनाते हैं पर पटाखों के उपयोग से एक तो हम अपने ही पृथ्वी को बर्बाद करते हैं और दूसरी और पटाखों के हादसों से कई लोग जख्मी हुए तो कुछ लोगों ने अपना जान खोया।

क्या पटाखों के साथ दिवाली मनाना सुख समृद्धि का त्यौहार दीपवाली हो सकता है? जी नहीं दोस्तों, दीपावली खुशियों का त्यौहार है और हर किसी को अपने दीपावली के त्यौहार को शांति से ख़ुशी के साथ बिना पटाखों के मनाना चाहिए।

दिवाली में पटाखों का उपयोग क्यों ना करें?

  • अब आप पूछेंगे ऐसा क्या है इन पटाखों में जिसके कारण आज हम इसके बारे में बात कर रहे हैं। चलिए आपको पटाखों से होने वाले कुछ महत्वपूर्ण हानियों के बारे में बताते हैं –
  • बड़े-बड़े डॉक्टरों का कहना है की ह्रदय और फूस-फूस रोगी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के रोगियों की तबियत पटाखों के प्रदुषण के कारण और भी ज्यादा ख़राब हो जाती है। इसलिए इस प्रकार के रोगी दीपवाली के समय घर से बहार बिलकुल ना निकलें।
  • एक तो हम स्वच्छ भारत अभियान को अमल लाने की बात करते हैं और दूसरी ओर पटाखों को फोड़ कर अपने वातावरण को और भी दूषित कर रहे हैं। कई हज़ार टन पटाखों का कूड़ा हम एक दीपावली के दिन में ही अपने देश भर में फैला देते हैं और दोष देते हैं नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों पर। क्या ये सही है?
  • यह पटाखों का ज़हरीला कूड़ा जब जमीन में धस कर रह जाता है तो मिट्टी प्रदूषण, जब जलने के बाद धुआं तो वायु प्रदुषण, पटाखों के फूटने की वजह से ध्वनि प्रदुषण, और वही जला हुआ जहरीला कूड़ा जब नदियों में जाता है तो जल प्रदुषण फैलता है। बस दो पल के बेकार की ख़ुशी के लिए हम अपना और आने वाली पीढ़ी का जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
  • पटाखे बहुत ही जहरीले रसायनों से बना होता है जिनसे कैंसर तक होने का खतरा बना रहता है। वही रसायन पदार्थ पटाखे फूटने के बाद नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड जैसे खतरनाक गैसों हमारे पर्यावरण में मिल जाते हैं।
  •  पटाखों का उपयोग सबसे ज्यादा बच्चे करते हैं और इसीलिए इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। बाद में यही पटाखे कई प्रकार के इन्फेक्शन और बिमारियों का कारन बनते हैं।
  • वैसे तो बच्चों के हाँथ में फुलझड़ियाँ कितनी अच्छी दिखती है पर क्या आपको पता है उसके धुएं में भी खतरनाक जहरीले पदार्थ जैसे बेरियम, स्ट्रोंशियम, कॉपर, आयरन होते हैं जो बच्चों के शरीर के लिए बहुत ही हानिकर होते हैं।
  • वैसे तो पटाखे शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पहुंचाते हैं परन्तु पटाखे शरीर को बाहरी तरफ से बहुत चोट पहुंचा सकते हैं। प्रतिवर्ष देश भर में कई ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं जिनके कारण कई लोग अपने ऑंखें खो देते हैं, कई लोगों के हाँथ पैर जल जाते हैं तो कुछ लोगों की इसमें जान भी चले जाती है।
  • दिवाली के पटाखों से प्रदुषण दिल्ली जैसे महानगरों में कुछ इस प्रकार होता है की सरदी के महीने में कोहरे और बादल के जैसा दिखने लगता है। यहाँ तक भी कहा गया है की दीपावली की वजह से भारत का 50% वायु प्रदुषण से ढक जाता है।
  • अगर हम चाहें तो दीपावली के त्यौहार को बिना पटाखों के भी मना सकते हैं। बस उसके लिए दृढ संकल्प और सही सोच की आवश्यकता है। क्या हम सभी अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ मिलकर एक स्वच्छ स्वस्थ दिवाली नहीं मना सकते हैं? आशा करते हैं आपकी इस बार की दिवाली पटाखों के बिना खुशियों से बहरी हुई हो !

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